Class 10 (NIOS) के मनोविज्ञान अध्याय 6: स्मृति (Memory)
यह पाठ मानव स्मृति की जटिल कार्यप्रणाली और मनोविज्ञान में इसके महत्व का एक विस्तृत विवरण प्रस्तुत करता है। इसमें मुख्य रूप से स्मृति की तीन अवस्थाओं—संवेदी, अल्पकालिक और दीर्घकालिक स्मृति—के बीच के अंतर और उनके कार्यों को समझाया गया है। लेखक ने विस्मृति (भूलने) के पीछे के कारणों, जैसे सूचनाओं के बीच हस्तक्षेप और समय के साथ यादों का धुंधला होना, पर भी प्रकाश डाला है। इसके अतिरिक्त, पाठ में स्मरण शक्ति बढ़ाने के व्यावहारिक तरीके बताए गए हैं, जिनमें सूचनाओं को समूहों में बांटना और दृश्य संकेतों का उपयोग करना शामिल है। यह स्रोत स्पष्ट करता है कि स्मृति केवल सूचनाओं का संचय नहीं है, बल्कि एक सक्रिय मानसिक प्रक्रिया है जो हमारे अनुभवों को निरंतरता प्रदान करती है। अंत में, विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से यह दर्शाया गया है कि कैसे अभ्यास और एकाग्रता हमारी सीखने की क्षमता को बेहतर बना सकते हैं।
स्मृति का परिचय और महत्व
स्मृति हमारे जीवन की एक अनिवार्य और गतिक प्रणाली है। यह केवल जानकारी को याद रखना नहीं है, बल्कि यह हमारे अनुभवों के प्रवाह में एक ‘सेतु’ (पुल) के समान कार्य करती है जो हमें निरंतरता का बोध कराती है।
- सीखना बनाम स्मृति: मनोविज्ञान में ‘सीखने’ का अर्थ है अनुभवों के माध्यम से नए व्यवहार अर्जित करना, जबकि ‘स्मृति’ उस सीखे हुए व्यवहार को सूचना के रूप में संचित करने और जरूरत पड़ने पर उसका उपयोग करने की प्रक्रिया है।
- महत्व: यदि कोई व्यक्ति अपनी स्मृति खो देता है, तो वह अपनी पहचान और अनुभवों से जुड़ाव खो देता है, जैसा कि अल्जाइमर जैसी बीमारियों में देखा जाता है。
2. धारण (Retention) और उसका मापन
स्मृति की वह विशिष्ट प्रक्रिया जिसमें सूचनाओं का संचय होता है, उसे ‘धारण’ कहते हैं। हम स्मृति को सीधे नहीं देख सकते, लेकिन तीन विधियों द्वारा इसे माप सकते हैं:
- पहचान (Recognition): जब कोई उद्दीपक (जैसे किसी का चेहरा या बहुविकल्पीय प्रश्न) हमारे सामने होता है, तो हम अपनी स्मृति में मौजूद जानकारी से उसका मिलान करते हैं। यह पुनःस्मरण से आसान होता है।
- पुनःस्मरण (Recall): जब सामने कोई संकेत न हो और हमें अपनी स्मृति से जानकारी खोजकर निकालनी पड़े (जैसे परीक्षा में उत्तर लिखना)।
- पुनःसीखना (Relearning): किसी सामग्री को दोबारा सीखना। इसमें वास्तविक सीखने की तुलना में बहुत कम समय लगता है।
3. स्मृति की अवस्थाएं (Stages of Memory)
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार स्मृति एक इकाई नहीं बल्कि तीन प्रणालियों का मिश्रण है:
- सांवेदिक स्मृति (Sensory Memory): यह सूचनाओं को बहुत कम समय के लिए रखती है। दृश्य सूचनाएं लगभग 1/2 सेकंड और ध्वनि सूचनाएं 2 सेकंड तक रहती हैं।
- अल्पकालिक स्मृति (Short-term Memory – STM): यदि हम जानकारी पर ध्यान देते हैं, तो वह यहाँ आती है। यह लगभग 30 सेकंड तक रहती है। इसकी क्षमता 7 ± 2 इकाइयां होती है। ‘चंकिंग’ (Chunking) के द्वारा (जैसे फोन नंबर को हिस्सों में बांटकर) इसकी क्षमता बढ़ाई जा सकती है。
- दीर्घकालिक स्मृति (Long-term Memory – LTM): इसमें सूचनाएं जीवन पर्यंत और असीमित मात्रा में संचित रह सकती हैं।
4. स्मृति के प्रकार
दीर्घकालिक स्मृति को चार प्रमुख भागों में बांटा गया है:
- शब्दार्थ विषयक (Semantic): सामान्य ज्ञान, शब्दों के अर्थ और किताबों से सीखी गई जानकारी।
- वृत्तात्मक (Episodic): आपके जीवन के व्यक्तिगत अनुभव और अनोखी घटनाएं।
- प्रक्रियात्मक (Procedural): किसी कार्य को करने का तरीका (जैसे साइकिल चलाना या तैरना)।
- तत्व स्मृति (Meta-memory): अपनी ही स्मृति के बारे में हमारी समझ कि हम क्या और कितना याद रख सकते हैं।
5. विस्मृति (Forgetting): हम क्यों भूलते हैं?
सूचनाओं को आवश्यकता के समय पुनः प्राप्त न कर पाना विस्मृति है। इसके प्रमुख कारण हैं-
- ह्रास (Decay): समय बीतने के साथ स्मृति चिन्हों का धुंधला पड़ जाना।
- हस्तक्षेप (Interference): यह दो प्रकार का होता है:
- पूर्वुलक्षी: नई जानकारी पुरानी को याद रखने में बाधा डालती है।
- अग्रलक्षी: पुरानी आदतें नई चीज सीखने में बाधा डालती हैं (जैसे गियर वाले स्कूटर की आदत के कारण बिना गियर वाला स्कूटर चलाने में दिक्कत)।
- प्रक्रम का स्तर: यदि हम जानकारी को गहराई से नहीं समझते और केवल ‘सतही’ तौर पर पढ़ते हैं, तो हम उसे जल्दी भूल जाते हैं।
- दमन (Repression): दुखद या डरावने अनुभवों को अनजाने में भूल जाना।
6. स्मृति बढ़ाने के उपाय (Improvement Strategies)
अपनी स्मरण शक्ति सुधारने के लिए आप निम्नलिखित तकनीकें अपना सकते हैं-
- गहन प्रक्रम (Deep Processing): जानकारी के अर्थ को समझें और उसे पुराने ज्ञान से जोड़ें।
- हस्तक्षेप कम करना: एक जैसे विषयों को एक साथ न पढ़ें, बीच में अंतराल रखें।
- विभाजित अभ्यास (Distributed Practice): लंबे पाठों को छोटे हिस्सों में बांटकर और बीच में विश्राम लेकर याद करें।
- स्मृति सहायक (Mnemonics): दृश्यों और संकेतों का उपयोग करें।
- एक्रोनिम (Acronyms): शब्दों के पहले अक्षरों से नया शब्द बनाना। जैसे इंद्रधनुष के लिए ‘VIBGYOR’ या मुगल सम्राटों के क्रम के लिए ‘BHAJSA’।
- हाइलाइटर का प्रयोग: महत्वपूर्ण बिंदुओं को चिन्हित करें और मस्तिष्क-मानचित्र (Mind Maps) बनाएँ
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