Class 10 (NIOS) विषय: चित्रकला (Painting) अध्याय 5: पुनर्जागरण (Renaissance)
पुनर्जागरण (Renaissance) काल की पश्चिमी कला, वास्तुकला और साहित्य के पुनरुत्थान का विस्तृत विवरण प्रदान करता है। इसमें 14वीं से 17वीं शताब्दी के बीच हुए कलात्मक नवाचारों, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और प्राचीन ग्रीक एवं रोमन संस्कृति के प्रभाव को रेखांकित किया गया है। स्रोत में सैंड्रो बोत्तीचेली की ‘वीनस का जन्म’ और लियोनार्दो द विंची की सुप्रसिद्ध ‘मोनालिसा’ जैसी महान कृतियों की बारीकियों का विश्लेषण किया गया है। इसके अतिरिक्त, माइकल एंजेलो की मूर्तिकला ‘पीटा’ और रेम्ब्रों की पेंटिंग ‘द नाइट वॉच’ के माध्यम से उस युग की उत्कृष्ट शैली को समझाया गया है। यह सामग्री मुख्य रूप से कला के छात्रों को इस ऐतिहासिक काल के प्रमुख कलाकारों और उनकी रचनात्मक तकनीकों से परिचित कराने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इस प्रकार, यह संपूर्ण लेख मानवीय भावनाओं और प्राकृतिक संतुलन के चित्रण पर आधारित एक शैक्षिक मार्गदर्शिका है।
पुनर्जागरण (Renaissance) का परिचय
पुनर्जागरण (Renaissance) शब्द का अर्थ है ‘पुनर्जीवन’ या ‘फिर से जागना’। कला के इतिहास में यह काल 14वीं शताब्दी से 17वीं शताब्दी तक माना जाता है, जिसमें कला, वास्तुकला और साहित्य का पुनरुद्धार हुआ। इसकी शुरुआत यूनान (ग्रीस) और रोम की प्राचीन और प्रतिष्ठित संस्कृति के प्रति बढ़ते आकर्षण के साथ हुई।
इस युग को ‘जागरण का युग’ कहा जाता है क्योंकि इसमें नए प्रयोगों, तर्कशक्ति, नए नियमों और नई खोजों पर बल दिया गया। पुनर्जागरण काल को तीन चरणों में बाँटा गया है: प्राथमिक पुनर्जागरण, उच्च पुनर्जागरण और अंत में अति पुनर्जागरण (Baroque)।
कलात्मक विशेषताएँ
इस काल के कलाकारों ने अपनी पेंटिंग में वैज्ञानिक अनुपात, दृष्टिकोण (perspective) और शरीर की बनावट (anatomy) पर ध्यान देना शुरू किया। 15वीं शताब्दी तक आते-आते कला और प्रकृति के बीच संतुलन और समन्वय पर जोर दिया गया। कलाकारों ने प्रकाश और छाया (Light and Shadow) के अद्भुत प्रयोग से चित्रों में गहराई और वास्तविकता लाने की कोशिश की।
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प्रमुख कलाकार और उनकी विश्व प्रसिद्ध कृतियाँ
अध्याय में चार प्रमुख कलाकृतियों का विस्तार से वर्णन किया गया है:
1. वीनस का जन्म (The Birth of Venus)
- कलाकार: सैंड्रो बोतिचेल्ली (Sandro Botticelli)
- समय: 1485-1486
- माध्यम: कैनवास पर डिस्टेम्पर
- विवरण: इस चित्र में यूनानी देवी वीनस को पानी में एक सीप से उत्पन्न होते हुए दिखाया गया है। वीनस को यहाँ सौंदर्य और सत्य के प्रतीक के रूप में दर्शाया गया है।
- विशेषता: चित्र में ऋतुओं की देवी वीनस को कपड़े ढकने के लिए दे रही हैं, जबकि दूसरी ओर पवन देव वायु प्रवाहित कर रहे हैं। वीनस की गर्दन लंबी और कंधे झुके हुए दिखाए गए हैं, जो पूरी तरह से यथार्थवादी न होकर एक कोमल और शांतिपूर्ण सौंदर्य का आभास कराते हैं।
2. मोदालिसा (Mona Lisa)
- कलाकार: लियोनार्दो दा विंची (Leonardo da Vinci)
- समय: 16वीं शताब्दी
- माध्यम: पहाड़ी लकड़ी पर तैलीय रंग (Oil on wood)
- विवरण: लियोनार्दो एक महान कलाकार के साथ-साथ एक वैज्ञानिक भी थे। मोनालिसा अपने चेहरे की रहस्यमय मुस्कान के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।
- विशेषता: इस चित्र की बनावट पिरामिड की तरह है, जिसमें मोनालिसा के जुड़े हुए हाथ आधार का काम करते हैं। चित्र में प्रकाश और छाया का नाटकीय उपयोग किया गया है। दिलचस्प बात यह है कि मोनालिसा के चेहरे पर भौहें (eyebrows) और पलकें नहीं दिखाई देतीं, फिर भी उनकी मुस्कान आँखों से बहुत स्पष्ट लगती है। इसकी पृष्ठभूमि में बर्फीले पहाड़, घाटी और नदी का प्राकृतिक दृश्य है।
3. पीएता (Pieta)
- कलाकार: माइकल एंजेलो (Michael Angelo)
- समय: 1498-1499
- माध्यम: संगमरमर की मूर्ति (Marble Sculpture)
- विवरण: यह मूर्ति माइकल एंजेलो द्वारा संगमरमर की एक ही शिला (पत्थर) को काटकर बनाई गई है। इसमें कुमारी मैरी को अपने मृत पुत्र ईसा मसीह के शरीर को गोद में लिए हुए दिखाया गया है।
- विशेषता: मूर्ति की संरचना पिरामिड जैसी (स्तंभीय) है। कलाकार ने मैरी की पवित्रता दिखाने के लिए उन्हें उनके पुत्र ईसा से भी कम उम्र का दिखाया है। मूर्ति के कपड़ों की सिलवटें और शरीर की बनावट अत्यंत परिष्कृत और सजीव है।
4. द नाइट वॉच (The Night Watch)
- कलाकार: रेम्ब्रां (Rembrandt)
- समय: 1642
- माध्यम: कैनवास पर तैलीय रंग
- विवरण: रेम्ब्रां एक डच यथार्थवादी कलाकार थे जो प्रकाश और छाया के रहस्यमयी प्रदर्शन के लिए जाने जाते थे। यह चित्र एक युवा कप्तान को अपने लेफ्टिनेंट और सैनिकों को आगे बढ़ने का आदेश देते हुए दिखाता है।
- एक रोचक तथ्य: लंबे समय तक इस चित्र पर गहरा वार्निश (रोगन) लगा होने के कारण लोगों को लगा कि यह रात का दृश्य है, इसीलिए इसका नाम ‘द नाइट वॉच’ पड़ा。 लेकिन 1940 में जब वार्निश हटाया गया, तो पता चला कि यह दिन के उजाले का दृश्य था।
- प्रतीक: चित्र में लाल और पीले रंग विजय के प्रतीक हैं, और एक छोटी लड़की की बेल्ट से लटका मरा हुआ चूजा दुश्मन की हार को दर्शाता है।
निष्कर्ष: हमने क्या सीखा?
पुनर्जागरण काल केवल कला का विकास नहीं था, बल्कि यह मनुष्य की सोच में आए बदलाव का परिणाम था। इस युग के कलाकारों ने मानव शरीर की बनावट, परिप्रेक्ष्य (perspective) और प्रकाश के प्रभाव को समझकर कला को एक नई ऊँचाई दी। मोंटाचिओ, बोतिचेल्ली, लियोनार्दो, माइकल एंजेलो और रेम्ब्रां जैसे दिग्गजों ने अपनी कृतियों के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के लिए कला का एक आदर्श स्थापित किया।
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