Class 10 (NIOS) चित्रकला (Painting) अध्याय 6: प्रभाववाद (Impressionism)
प्रभाववाद और उत्तर-प्रभाववाद नामक प्रमुख कला आंदोलनों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करता है। इसमें बताया गया है कि कैसे क्लाउड मोने, अगस्त रेनॉयर और एडगर देगा जैसे कलाकारों ने पारंपरिक शैलियों को छोड़कर प्राकृतिक रोशनी और दैनिक जीवन के दृश्यों को अपनी पेंटिंग्स में उतारा। रेनॉयर की ‘मुलिन डी ला गैलेट’ और देगा की ‘डांस क्लास’ जैसी कृतियों के माध्यम से उनकी विशिष्ट कार्यशैली और विषयों को समझाया गया है। इसके अतिरिक्त, यह स्रोत पॉल सेज़ान और विन्सेंट वान गॉग के योगदान पर भी प्रकाश डालता है, जिन्होंने आधुनिक कला और घनवाद की नींव रखी। सेज़ान ने वस्तुओं को ज्यामितीय आकारों में देखा, जबकि वान गॉग ने अपनी प्रसिद्ध पेंटिंग ‘स्टारी नाइट’ में रंगों के माध्यम से गहरी भावनाओं को व्यक्त किया।
प्रभाववाद: कला में एक नई क्रांति
प्रभाववाद कला के क्षेत्र में एक ऐसा आंदोलन था जिसने कला की पारंपरिक और शास्त्रीय शैलियों को चुनौती दी। इसकी शुरुआत 1874 में कलाकारों के एक समूह द्वारा आयोजित पहली प्रदर्शनी से हुई, जहाँ एक आलोचक ने व्यंग्य में इस शैली को ‘प्रभाववाद’ का नाम दिया।
इस आंदोलन की मुख्य विशेषता यह थी कि कलाकारों ने बंद स्टूडियो से बाहर निकलकर खुले वातावरण में चित्रकारी करना शुरू किया। उनका मुख्य उद्देश्य वस्तुओं पर प्रकाश के प्रभाव को चित्रित करना था। ये कलाकार प्रकृति के बदलते रंगों और रोशनी को अपनी कल्पना शक्ति से तुरंत कैनवास पर उतारने का प्रयास करते थे।
प्रमुख प्रभाववादी कलाकार और उनकी कृतियाँ
1. क्लाउड मोने (Claude Monet) – ‘वॉटर लिलीज’ (Water Lilies)
मोने प्रभाववाद के सबसे समर्पित कलाकार माने जाते हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन प्रकृति के बदलते मिजाज को समझने और उसे चित्रित करने में बिताया।
- पेंटिंग का विवरण: ‘वॉटर लिलीज’ (1899) उनके द्वारा बनाई गई चित्रों की एक श्रृंखला है। इसमें एक तालाब के ऊपर बने जापानी पुल को दिखाया गया है।
- विशेषता: मोने ने इस चित्र में आकाश को सीधे तौर पर नहीं दिखाया, बल्कि उसे पानी की गहराई में चमकदार रंगों के प्रतिबिंब के रूप में उभारा है। खिलते हुए लिली के फूल चित्र की सुंदरता को और बढ़ा देते हैं।
2. ऑगस्ट रेनोइया (Auguste Renoir) – ‘मोयुलिन दे ला गैलेत’ (Moulin De La Galette)
रेनोइया एक फ्रांसीसी कलाकार थे, जिनकी कला में कोमलता और प्रसन्नता झलकती है।
- पेंटिंग का विवरण: 1876 में बनी इस कृति में युवा लोगों को पिकनिक मनाते, नाचते और पार्टी करते हुए दिखाया गया है।
- विशेषता: उन्होंने फ्रांसीसी समाज के जीवंत वातावरण को चित्रित किया है। बैंगनी, सफेद और नीले रंगों के तालमेल से उन्होंने मॉडलों के कपड़ों पर प्रकाश और छाया का अद्भुत खेल दिखाया है, जिससे चित्र में जीवन की झिलमिलाहट का अनुभव होता है।
3. एडगर देगा (Edgar Degas) – ‘डांस क्लास’ (Dance Class)
देगा अन्य प्रभाववादियों से थोड़े अलग थे क्योंकि उनकी रुचि प्रकृति के बजाय मानवीय आकृतियों और उनकी गतिविधियों में अधिक थी।
- पेंटिंग का विवरण: 1873-1876 के बीच बने इस चित्र में बैले नर्तकियों को अभ्यास करते हुए दिखाया गया है।
- विशेषता: देगा ने इस चित्र में सूर्य की रोशनी के बजाय रंगमंच की कृत्रिम रोशनी का प्रयोग किया है। वे अपनी कला में पेस्टल रंगों का अधिक उपयोग करते थे और नर्तकियों की लयबद्ध गति को दिखाने के लिए उन्होंने मूर्तियाँ भी बनाईं।
उत्तर-प्रभाववाद (Post-Impressionism): नया दृष्टिकोण
उत्तर-प्रभाववाद, प्रभाववाद की सीमाओं को तोड़ने का एक प्रयास था। इसमें कलाकारों ने केवल जो देखा उसे ही नहीं, बल्कि अपनी आंतरिक भावनाओं, ज्ञान और रंगों के साहसी प्रयोग को महत्व दिया।
1. पॉल सेजाँ (Paul Cezanne) – ‘स्टिल लाइफ विद अनियन्स’ (Still Life with Onions)
सेजाँ को ‘घनवाद (Cubism) का जनक’ कहा जाता है। उनका मानना था कि प्रकृति की हर वस्तु को ज्यामितीय आकारों जैसे शंकु, बेलन और घन में बदला जा सकता है।
- पेंटिंग का विवरण: 1895-1900 के बीच बनी इस कृति में उन्होंने साधारण प्याज और बोतलों को चित्रित किया है।
- विशेषता: उन्होंने रंगों के माध्यम से प्रकाश और छाया को नए अर्थ दिए और त्रि-विमीय (3D) आकारों का सुंदर विन्यास प्रस्तुत किया।
2. विन्सेंट वान गॉग (Vincent Van Gogh) – ‘स्टारी नाइट’ (Starry Night)
वान गॉग एक डच कलाकार थे, जिनके जीवन में गरीबी और संघर्ष था, लेकिन उनकी कला रंगों के प्रति अत्यंत समर्पित थी।
- पेंटिंग का विवरण: 1889 में बनी ‘स्टारी नाइट’ में सितारों से भरा पूरा आसमान दिखाया गया है। इसमें बलखाते बादल, टिमटिमाते तारे और चमकता चंद्रमा है।
- विशेषता: उन्होंने नीले और सफेद रंगों की गहरी पट्टियों का प्रयोग किया है, जिससे तारे भँवर की तरह घूमते हुए प्रतीत होते हैं। यह चित्र कलाकार के आंतरिक द्वंद्व और बेचैनी को व्यक्त करता है।
निष्कर्ष: हमने क्या सीखा?
- प्रभाववाद ने दैनिक जीवन की सादगी और खुले वातावरण में प्रकाश के प्रभाव को पकड़ने पर जोर दिया।
- उत्तर-प्रभाववाद ने कला को कलाकार की निजी भावनाओं और ठोस ज्यामितीय संरचनाओं से जोड़ा।
- मोने, रेनोइया और देगा जैसे कलाकारों ने जहाँ दृश्य जगत की सुंदरता को उकेरा, वहीं सेजाँ और वान गॉग ने आधुनिक कला (जैसे घनवाद) के लिए आधार तैयार किया।
- चित्रकला (Painting) अध्याय 8: समकालीन भारतीय कला के पुरोगामी कलाकार | Leading Artists of Contemporary Indian Art
- चित्रकला (Painting) अध्याय 9: समकालीन भारतीय कला | Samakaleen Bharateey Kala
- चित्रकला (Painting) अध्याय 7: घनवाद, अतियथार्थवाद तथा अमूर्त कला | Cubism, Surrealism, and Abstract Art
- चित्रकला (Painting) अध्याय 6: प्रभाववाद (Impressionism)
- चित्रकला (Painting) अध्याय 5: पुनर्जागरण (Renaissance)