Class 10 (NIOS) के मनोविज्ञान पाठ्यक्रम अध्याय 14: संप्रेषण (Communication)
यह पाठ मनोविज्ञान के अंतर्गत अभिवृत्ति (Attitude), विश्वास और सामाजिक संज्ञान की अवधारणाओं की व्याख्या करता है। लेखक के अनुसार, अभिवृत्ति किसी व्यक्ति या वस्तु के प्रति हमारा सकारात्मक या नकारात्मक मूल्यांकन है, जो संज्ञानात्मक, प्रभावी और व्यवहारपरक घटकों से निर्मित होती है। इसमें बताया गया है कि हमारी धारणाएं सीधे संपर्क, निर्देशों और सामाजिक समूहों के माध्यम से विकसित होती हैं, जिन्हें विश्वसनीय स्रोतों और स्पष्ट संदेशों द्वारा बदला भी जा सकता है। इसके अतिरिक्त, यह सामग्री सामाजिक संज्ञान और स्कीमा (Schema) के महत्व पर प्रकाश डालती है, जो हमें जटिल सामाजिक सूचनाओं को व्यवस्थित करने और समझने में मदद करते हैं। अंततः, यह स्पष्ट किया गया है कि यद्यपि अभिवृत्तियां स्थिर होती हैं, फिर भी वे हमारे सामाजिक व्यवहार और व्यक्तिगत पहचान को गहराई से प्रभावित करती हैं।
1. अभिवृत्ति (Attitude) की प्रकृति
जब हम किसी व्यक्ति, वस्तु या घटना से मिलते हैं, तो हम अनजाने में ही उसका मूल्यांकन करने लगते हैं। मनोविज्ञान की भाषा में, लोगों, वस्तुओं और स्थितियों के प्रति हमारे अनुकूल या प्रतिकूल मूल्यांकन को ‘अभिवृत्ति’ (Attitude) कहा जाता है।
अभिवृत्ति के तीन मुख्य घटक होते हैं-
- संज्ञानात्मक भाग (Cognitive): यह हमारी उस सोच या विश्वास से संबंधित है जो हम किसी चीज़ के बारे में रखते हैं।
- प्रभावी भाग (Affective): यह हमारे मूल्यांकन की तीव्रता या उस वस्तु के प्रति हमारी भावनाओं (जैसे प्रेम, घृणा, पसंद या नापसंद) को दर्शाता है।
- व्यावहारिक भाग (Behavioral): यह उस वस्तु या व्यक्ति के प्रति एक विशेष तरीके से कार्य करने की संभावना को दर्शाता है।
आमतौर पर ये तीनों घटक एक साथ काम करते हैं। उदाहरण के लिए, यदि आप क्रिकेट पसंद करते हैं (भावना), तो आप सचिन तेंदुलकर के बारे में अच्छा सोचेंगे (संज्ञान) और उनका मैच देखने जरूर जाएंगे (व्यवहार)।
2. अभिवृत्ति के कार्य (Functions of Attitude)
अभिवृत्ति हमारे सामाजिक जीवन को सरल बनाती है। इसके चार प्रमुख कार्य हैं:
- संसार को समझना: सकारात्मक अभिवृत्ति हमें अच्छे लोगों के पास जाने में मदद करती है, जबकि नकारात्मक अभिवृत्ति हमें हानिकारक स्थितियों से दूर रखती है।
- सामाजिक समूह की पहचान: हम जिस परिवार या समूह (धार्मिक या राजनीतिक) के सदस्य होते हैं, वैसी ही अभिवृत्ति हमें दूसरों के साथ जोड़कर रखती है।
- स्वयं की पहचान: अभिवृत्ति हमारे मूल्यों (जैसे ईमानदारी या करुणा) और आत्म-संप्रत्यय को व्यक्त करती है।
- दूसरों से प्रशंसा और स्वीकृति: समान रुचि और अभिवृत्ति वाले लोग एक-दूसरे की ओर आकर्षित होते हैं, जिससे दोस्ती बनी रहती है।
3. अभिवृत्ति का निर्माण और परिवर्तन
अभिवृत्ति जन्मजात नहीं होती, इसे सीखा जाता है। इसके निर्माण के मुख्य तरीके हैं:
- सीधा संपर्क: किसी वस्तु के साथ बार-बार जुड़ने से उसके प्रति भावनाएं विकसित होती हैं (जैसे किसी विशेष स्वाद का भोजन पसंद या नापसंद करना)।
- सीधा निर्देश: माता-पिता या शिक्षक जब हमें कुछ सिखाते हैं (जैसे धूम्रपान सेहत के लिए बुरा है), तो वैसी अभिवृत्ति बन जाती है।
- दूसरों से बातचीत: हम अपने दोस्तों के समूह की सोच को अपना लेते हैं ताकि हमें उनकी स्वीकृति मिल सके。
- प्रेक्षण द्वारा सीखना (Observation): हम दूसरों (जैसे माता-पिता, मीडिया या टीवी) को देखकर भी उनकी तरह सोचना और व्यवहार करना सीख जाते हैं।
परिवर्तन: हालांकि अभिवृत्ति को बदलना कठिन होता है, लेकिन इसे बदला जा सकता है। यह तीन कारकों पर निर्भर करता है: स्रोत (संदेश देने वाला व्यक्ति विश्वसनीय होना चाहिए), संदेश (जानकारी स्पष्ट और व्यवस्थित हो), और व्यक्ति (उसकी अपनी विशेषताएं)।
4. अभिवृत्ति और व्यवहार के बीच संबंध
अभिवृत्ति और व्यवहार का संबंध जटिल है। कई बार लोग सोचते कुछ हैं और करते कुछ और (जैसे- ग्लोबल वार्मिंग की चिंता करना लेकिन बड़ी गाड़ी चलाना)। अभिवृत्ति व्यवहार की भविष्यवाणी तब बेहतर करती है जब:
- अभिवृत्ति बहुत मजबूत और स्पष्ट हो।
- वह सीधे अनुभव से बनी हो।
- बाहरी सामाजिक दबाव कम हो।
5. विश्वास (Belief) और व्यवहार
विश्वास का अर्थ है किसी चीज़ को सत्य की भांति स्वीकार करना। एक बार विश्वास बन जाने पर उसे हिलाना कठिन होता है (जैसे- भगवान पर विश्वास या पुनर्जन्म का विश्वास)। विश्वास हमें यह समझने में मदद करते हैं कि लोग एक विशेष प्रकार का व्यवहार क्यों करते हैं और भविष्य में क्या हो सकता है।
6. सामाजिक संज्ञान (Social Cognition)
सामाजिक संज्ञान का अर्थ है अपने आस-पास के सामाजिक जगत से जानकारी प्राप्त करना, उसकी व्याख्या करना और उसे याद रखना। इसमें दो महत्वपूर्ण अवधारणाएं हैं:
- स्कीमा (Schema): यह हमारे दिमाग में बनी पुरानी जानकारी और अनुभवों का समूह है जो हमें नई स्थितियों को जल्दी समझने में मदद करता है (जैसे- जन्मदिन की पार्टी का नाम सुनते ही दिमाग में केक और गुब्बारों का चित्र आना)।
- गुणारोपण (Attribution): हम अक्सर दूसरों के व्यवहार के कारणों की खोज करते हैं। इसके दो कारण हो सकते हैं: आंतरिक (व्यक्ति का स्वभाव) या बाह्य (परिस्थितियाँ)।
7. सामाजिक संज्ञान में त्रुटियाँ (Biases)
संसार को समझने की प्रक्रिया में हम अक्सर गलतियाँ करते हैं:
- मौलिक गुणारोपण त्रुटि: दूसरों की गलती पर हम उनके स्वभाव को दोष देते हैं, लेकिन अपनी गलती पर हम परिस्थिति (जैसे ट्रैफिक जैम) को दोष देते हैं।
- आशावादी पक्षपात: हम मानते हैं कि हमारे साथ दूसरों की तुलना में अधिक अच्छी घटनाएं होंगी।
- नकारात्मक पक्षपात: हम नकारात्मक जानकारी पर अधिक ध्यान देते हैं और उसे जल्दी याद रखते हैं।
- अवास्तविक सोच: ‘क्या होना चाहिए था’ या ‘काश ऐसा होता’ जैसे पछतावे में डूबे रहना।
निष्कर्ष: अभिवृत्ति, विश्वास और सामाजिक संज्ञान हमें इस जटिल दुनिया को समझने और उसमें रहने में मदद करते हैं। हालांकि हमारी सोच में कुछ पक्षपात हो सकते हैं, लेकिन ये हमें जानकारी को सरल बनाने में मदद करते हैं।
मनोविज्ञान: अभिवृत्ति, विश्वास और सामाजिक संज्ञान की अवधारणाएँ
| विषय या अवधारणा | परिभाषा या विवरण | मुख्य घटक या कारक | कार्य या महत्व | उदाहरण | सीखने की विधि/स्रोत | स्रोत |
|---|---|---|---|---|---|---|
| अभिवृत्ति (Attitude) | लोगों, वस्तुओं तथा परिस्थितियों के प्रति हमारे अनुकूल या प्रतिकूल मूल्यांकन को अभिवृत्ति कहा जाता है। | संज्ञानात्मक भाग (विश्वास), प्रभावी भाग (भावनाएं), और व्यावहारिक भाग (अभिनय की संभावना)। | संसार को समझने में सहायता, सामाजिक समूहों का वर्णन, आत्म-पहचान व्यक्त करना और प्रशंसा/स्वीकृति प्राप्त करना। | ‘मुझे शास्त्रीय संगीत अच्छा लगता है’ या ‘मुझे रॉक संगीत अच्छा नहीं लगता’। | सीधा संपर्क, सीधा निर्देश, दूसरों से बातचीत, और प्रेक्षण द्वारा सीखना। | [1] |
| विश्वास (Belief) | किसी भी चीज के प्रति सत्य की भांति स्वीकार्यता; जब किसी को दृढ़ विश्वास होता है, तो उसे हिलाया नहीं जा सकता। | सत्य की स्वीकार्यता और दृढ़ता। | सामाजिक जगत में अनुभवों को संयोजित करना, व्यवहार को समझना और घटनाओं के प्रति भविष्यवाणी करने में सहायक। | भगवान मनुष्य के भाग्य का नियंता है या पुनर्जन्म में विश्वास। | व्यक्तिगत अनुभव और सामाजिक संचार। | [1] |
| सामाजिक संज्ञान (Social Cognition) | सामाजिक विश्व से जानकारी प्राप्त करना, उसकी व्याख्या करना, मूल्यांकन करना और उसे याद रखना। | स्कीमा (Schema), अन्वेषणात्मक विधि (Heuristics), और गुणारोपण (Attribution)। | जानकारी का सरलीकरण करना ताकि नई जानकारी की व्याख्या शीघ्र की जा सके और सामाजिक सोच/व्यवहार का मार्गदर्शन करना। | जन्मदिन की पार्टी के बारे में पहले से पता होना कि क्या पहनना है और क्या उपहार ले जाना है। | पुराने अनुभव और जानकारी का स्कीमा के रूप में संगठन। | [1] |
- मनोविज्ञान अध्याय 6: स्मृति | Memory
- मनोविज्ञान अध्याय 16: सामाजिक और शैक्षिक समस्याएँ | Social and Educational Problems
- मनोविज्ञान अध्याय 15: अभिवृत्ति, विश्वास और सामाजिक संज्ञान | Attitudes, Beliefs, And Social Cognition
- मनोविज्ञान अध्याय 14: संप्रेषण (Communication)
- मनोविज्ञान अध्याय 13: समूह और नेतृत्व | Groups and leadership