मनोविज्ञान अध्याय 14: संप्रेषण (Communication) 

कक्षा 10 (NIOS) के मनोविज्ञान पाठ्यक्रम  अध्याय 14: संप्रेषण (Communication) 

अध्याय-14: संप्रेषण (Communication)

यह पाठ मनोविज्ञान के अंतर्गत संप्रेषण (Communication) की प्रक्रिया और उसके विभिन्न माध्यमों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करता है। इसमें मौखिक और अमौखिक संचार के अंतर को स्पष्ट करते हुए बताया गया है कि मानवीय अंतःक्रिया में शारीरिक हाव-भाव और संकेतों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। प्रभावी संदेश भेजने के लिए साझा भाषा, समान संदर्भ और आपसी रुचि जैसे तत्वों को आवश्यक माना गया है। स्रोत विशेष रूप से भारतीय सांस्कृतिक परिवेश में सामाजिक दूरी, स्पर्श और नजरों के संपर्क जैसे गैर-शाब्दिक व्यवहारों के विशिष्ट अर्थों की व्याख्या करता है। इसके अतिरिक्त, इसमें जनसंचार माध्यमों के समाज पर पड़ने वाले सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों के साथ-साथ मीडिया की नैतिक जिम्मेदारियों पर भी प्रकाश डाला गया है। अंत में, संचार को और अधिक प्रभावी बनाने के व्यावहारिक सुझाव और सक्रिय श्रवण के महत्व को भी समझाया गया है।

संप्रेषण क्यों महत्वपूर्ण है?

जैसे जीवित रहने के लिए भोजन और आवास अनिवार्य हैं, वैसे ही संप्रेषण (Communication) भी जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण साधन है। हम अपने दैनिक जीवन में सूचनाओं, विचारों और भावनाओं को साझा करने के लिए शब्दों, प्रतीकों, ध्वनियों और हाव-भाव का उपयोग करते हैं। इस अध्याय में हम समझेंगे कि संप्रेषण क्या है, यह कैसे काम करता है और इसे प्रभावी कैसे बनाया जा सकता है।

1. संप्रेषण का अर्थ और परिभाषा

संप्रेषण केवल बातचीत करना नहीं है, बल्कि यह लोगों और पर्यावरण के साथ अंतःक्रिया (Interaction) की एक प्रक्रिया है। जब हम दूसरों से बात करते हैं, तो हम अपनी सूचनाओं और दृष्टिकोणों को साझा करने के लिए भाषा का उपयोग करते हैं। मनोविज्ञान के अनुसार, संप्रेषण एक व्यक्तिगत प्रक्रिया है जिससे हमारे व्यवहार में बदलाव आता है।

2. संप्रेषण के 5 मुख्य तत्व

किसी भी संप्रेषण को सफल बनाने के लिए निम्नलिखित पाँच तत्व आवश्यक हैं:

  1. द्विपक्षीय प्रक्रिया: इसमें हमेशा एक संदेश भेजने वाला और एक प्राप्त करने वाला होता है।
  2. संदेश: सूचना हमेशा किसी विचार, भावना, मार्गदर्शन या धारणा के रूप में होनी चाहिए।
  3. समझ की समानता: संप्रेषण तभी सफल है जब भेजने वाले और प्राप्त करने वाले के बीच भाषा, संस्कृति और वातावरण की समझ एक जैसी हो।
  4. व्यवहार में परिवर्तन: प्राप्त सूचना का उद्देश्य प्राप्तकर्ता के व्यवहार में कुछ बदलाव लाना होता है (जैसे आग की सूचना मिलने पर तुरंत भागना)।
  5. सूचना की विधि: यह शब्दों, चेष्टाओं या संकेतों के माध्यम से दी जा सकती है।

3. संप्रेषण के प्रकार

संप्रेषण को मुख्य रूप से दो भागों में बाँटा जा सकता है-

  • मौखिक संप्रेषण (Verbal Communication): जब हम बातचीत के लिए शब्दों का प्रयोग करते हैं, चाहे वह लिखित हो या मौखिक। इसमें पढ़ना, बोलना, लिखना और सुनना शामिल है। शोध बताते हैं कि लोग दिन के लगभग 10 से 11 घंटे मौखिक संप्रेषण में बिताते हैं।
  • अमौखिक संप्रेषण (Non-verbal Communication): यह जानकर आपको आश्चर्य होगा कि हमारे पूरे संप्रेषण का 70% भाग अमौखिक (हाव-भाव) होता है, जबकि शब्द केवल 10% होते हैं। इसमें आँखों का संपर्क, चेहरे के हाव-भाव, शारीरिक मुद्रा (Posture) और स्पर्श शामिल हैं।

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4. भारतीय संदर्भ में अमौखिक संप्रेषण

भारतीय संस्कृति में संकेतों के अपने विशिष्ट अर्थ हैं-

  • आदर और मर्यादा: भारत में बड़ों के सामने आँखें झुकाकर खड़ा होना आदर का प्रतीक माना जाता है। युवा अक्सर बड़ों के पैर छूकर उनका अभिवादन करते हैं।
  • शारीरिक दूरी: अपरिचितों से बात करते समय भारतीय आमतौर पर 1 से 1.5 मीटर की दूरी बनाए रखते हैं।
  • सांस्कृतिक संकेत: कलाई पर हाथ रखना पारंपरिक रूप से कंगन या चूड़ी की ओर संकेत करता है।

5. प्रभावी संप्रेषण और उसमें आने वाली बाधाएँ

अक्सर हम गलतफहमी के शिकार हो जाते हैं क्योंकि संप्रेषण प्रभावी नहीं होता।

बाधाएँ: संदेश को तोड़-मरोड़ कर पेश करना, अपनी भावनाओं (क्रोध या उदासी) के कारण सूचना को गलत समझना, या सूचना का अधिक भार होना।

प्रभावी संप्रेषण की विशेषताएँ-

  • समान संदर्भ: माँ जब बच्चे से बात करती है, तो वह बच्चे की शब्दावली का प्रयोग करती है।
  • समान रुचि: भेजने वाले और पाने वाले दोनों की विषय में रुचि होनी चाहिए।
  • समान भाषा: एक जैसी भाषा शब्दों और मुहावरों को गलत समझने की संभावना को कम करती है।

प्रभावी बनने के सुझाव: बोलने से पहले सोचें, बहुत जल्दी या बहुत जोर से न बोलें और दूसरों की संस्कृति के प्रति संवेदनशील रहें।

6. जनसंचार माध्यमों (Media) की भूमिका

आज हम टीवी, समाचार पत्र और इंटरनेट के युग में रहते हैं, जिनका हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

  • सकारात्मक प्रभाव: मीडिया हमें शिक्षित करता है, सामाजिक एकता लाता है और सरकारी नीतियों (जैसे टीकाकरण, पोलियो, एड्स जागरूकता) की जानकारी जनता तक पहुँचाता है।
  • नकारात्मक प्रभाव: इसका दुरुपयोग अफवाहें फैलाने, घृणा पैदा करने या बच्चों पर अश्लील सामग्री के माध्यम से गलत प्रभाव डालने के लिए भी किया जा सकता है।

संप्रेषण के प्रकार, तत्व और उनकी विशेषताएँ

संप्रेषण का प्रकारविवरणमुख्य तत्व/उदाहरणमहत्व/प्रभावभारतीय संदर्भ में उदाहरण
मौखिक संप्रेषणजब दो या दो से अधिक लोगों के बीच बातचीत के लिए शब्दों का प्रयोग किया जाए।बातचीत, भाषण, पत्र, समाचार-पत्र, पत्रिकाएं, फोन पर बातचीत।तर्कपूर्ण बातचीत के साथ-साथ जानकारी तथा दिशा प्रदान करता है; दैनिक जीवन की मूलभूत जरूरत।व्यावसायिक क्षेत्रों (जैसे दिल्ली, मुंबई) में पुरुषों और महिलाओं के बीच हाथ मिलाना आम है।
अमौखिक संप्रेषणबिना शब्दों के हाव-भाव और शारीरिक संकेतों के माध्यम से किया जाने वाला संचार।शारीरिक चेष्टाएं, चेहरे के हाव-भाव, नेत्र संपर्क, स्पर्श (हैप्टिक्स), दूरी (प्रॉक्सिमिक्स)।कुल संप्रेषण का 70% हिस्सा; भावनाओं और अंतर्वैयक्तिक मनोवृत्ति को प्रकट करने में सहायक।बड़ों के पैर छूकर अभिवादन करना; कलाई पर हाथ रखना (चूड़ी का संकेत);
सार्वजनिक स्थानों पर प्रेम प्रदर्शन न करना।
जन संप्रेषण (Mass Media)दर्शकों तक सूचना, विचार एवं मत पहुँचाने का तकनीकी साधन।टी.वी., समाचार-पत्र, रेडियो, इंटरनेट, विज्ञापन।सकारात्मक: शिक्षा, सामाजिक एकता, स्वास्थ्य जागरूकता (पोलियो, एड्स)। नकारात्मक: अफवाहें,
अश्लील सामग्री, गोपनीयता का हनन।
विज्ञापनों के प्रसिद्ध वाक्यांश जैसे ‘ठंडा मतलब कोका कोला’ या ‘दाग अच्छे हैं’ का प्रभाव।
संप्रेषण प्रक्रिया के तत्वसंप्रेषण को पूर्ण बनाने वाले अनिवार्य घटक।प्रेषक और प्राप्तकर्ता (द्विपक्षीय), संदेश, समझ की समानता, व्यवहार में परिवर्तन, सूचना देने की विधि।निर्णय लेने की प्रक्रिया को सरल बनाता है और लोगों को नियंत्रित तथा प्रोत्साहित करता है।समान पृष्ठभूमि, संस्कृति और भाषा के लोगों के बीच संदेश समझना आसान होता है।
संप्रेषण के प्रकार, तत्व और उनकी विशेषताएँ

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